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कैलाश {रावण} का मंदिर
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हम आप को कानपुर के ऐसे मंदिर से औगत करेंगे। जो आज तक न आप ने सुना होगा और देखा होगा। कानपुर में एक मंदिर ऐसा भी है जो साल में एक बार खुलता है। और एक बार उसके दर्शन करने के लिए भीड़ उमर आती हैं.वो हैं कानपुर का कैलाश मंदिर {रावण} का मंदिर जो शिवाला में है। यह मंदिर विजयदशमी के दिन खुलता है।और पूरे दिन मंदिर में लंकापति के सामने सरसो के तेल के दीपक लोगो द्वारा जलाए जाते हैं।और तरोई के फूल अर्पित किए जाते हैं। लोगो का म1नना है की रावन के दर्शन से बुरे विचारो का नास होगा। .कानपुर के शिवाला में भोलेनाथ के मंदिर के बगल में यह मंदिर बना हुआ है। लोगो का म1नना है की विजयदशमी के दिन कैलाश मंदिर में जो भी मन्नत मागी जाए वो पूरी हो जाती है।
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कैलाश {रावण} मंदिर का इतिहास:
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रावण मंदिर वर्ष में एक बार विजयदशमी के दिन खुलता है।बाकी 364 दिन बंद रहता है इस मंदिर को भगवान शिव के भक्त महाराज गुरु प्रसाद शुक्ल ने १८६८ में बनवाया था। रावण प्रकांड पंडित होने के साथ-साथ भगवान शिव का परम भक्त था। इसलिए शक्ति के प्रहरी के रूप में यहां कैलाश {रावण} मंदिर परिसर में रावण का मंदिर बनाया गया। भगवान शिव काे प्रसन्न करने के लिए देवी आराधना भी करता था। बताया जाता है कि उसकी पूजा से प्रसन्न हाेकर मां छिन्नमस्तिका ने उसे वरदान दिया था कि उनकी की गई पूजा तभी सफल हाेगी जब भक्त रावण की भी पूजा करेंगे।
इस लिए उन्होन शिव मंदिर में रावण का मंदिर बनवाया था.यह मंदिर साल में एक दिन विजयदशमी को खुलता है.जब रावन का पुतला देश में फुका जाता है.वह दिन मंदिर में पूजा पाठ होते हैं लोगो का कहना है.की इस दिन रावन का जन्म भी हुआ था.रावण के मंदिर में लोगो की बहुत ज्यादा भीड़ लगती है.लोग आज के दिन अपनी सारी मुर1दे लेके आते हैं.और लोगो का कहना है की उनकी सारी मुर1दे पूरी हो जाती है।मान्यता है की विजयदशमी के दिन लंकाधिराज रावन की आरती के समय नीलकंठ के दर्शन भक्तों को मिलते हैं।
कैलाश {रावण}का मंदिर का रास्ता
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यह मंदिर कानपुर में है, {कानपुर सेंट्रल स्टेशन} से इसकी दूर 4 किमी हैं। यहाँ आप चाहे तो शिवाला रिक्शा कर ले.. ..
नोट
अगर ब्लॉग में कोई गलती हुई हो तो माफ़ करे...हमारे ब्लॉग को जादा से जादा शेयर करे और टिप्पणी करे ..अगर कानपुर के बारे में कोई मार्केट या मंदिर के बारे में जानकारी चाहे तो कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हैंधन्यवाद








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